दिल्ली की एक अदालत ने एक्ट्रेस और सिंगर सपना चौधरी को 'घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम' के तहत अंतरिम सुरक्षा आदेश दिया है। इसके तहत उनके पति को अगली सुनवाई तक सपना से संपर्क करने या उनके घर, काम की जगह या फिल्म प्रीमियर वाली जगह पर जाने से रोक दिया गया है। द्वारका कोर्ट्स की जुडिशियल मजिस्ट्रेट (महिला कोर्ट) ने सपना चौधरी की ओर से पेश वकील प्रीति सिंह की दलीलें सुनने के बाद 9 जून, 2026 को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने प्रोटेक्शन ऑफिसर और स्थानीय SHO को आदेश दिया कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और जरूरत पड़ने पर सपना चौधरी की मदद करें।

वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रतिवादी की कानूनी पत्नी सपना चौधरी, उनके व्यवहार के कारण उनका घर छोड़कर चली गई थीं और अभी नजफगढ़, नई दिल्ली में अपने मायके में रह रही हैं।

कोर्ट ने दिया आदेश

अदालत ने सपना की शादी के बारे में उनके द्वारा जमा किए गए हलफनामे पर ध्यान दिया और कहा कि अगली सुनवाई में इससे जुड़े दस्तावेज जमा किए जाएंगे। शुरुआती तौर पर पर्याप्त सबूत मिलने पर, अदालत ने प्रतिवादी को समन जारी करने का आदेश दिया और प्रोटेक्शन ऑफिसर को घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) दाखिल करने का निर्देश दिया।

सपना चौधरी को पति का डर

वकील ने कथित घरेलू हिंसा और उसके दोबारा होने के डर का हवाला देते हुए, एक तरफा सुरक्षा आदेश के जरिए तुरंत अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने बताया कि सपना चौधरी को 10 जून, 2026 को अपनी फिल्म 'मोमाकु' के प्रीमियर में शामिल होना था, और उन्हें डर था कि प्रतिवादी उन्हें धमका सकता है, उन पर हमला कर सकता है या सार्वजनिक रूप से हंगामा कर सकता है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और कामों को नुकसान पहुंच सकता है। वकील ने तर्क दिया कि अस्थायी सुरक्षा आदेश देने से प्रतिवादी को कोई नुकसान नहीं होगा, जबकि इससे इनकार करने पर सपना की सुरक्षा और काम को नुकसान हो सकता है।

सपना के पति पर तमाम रोकें

कोर्ट ने सबूतों की समीक्षा की, जिनमें याचिकाकर्ता का हलफनामा, कथित तौर पर चोटों को दिखाने वाली तस्वीरें और आरोपों का समर्थन करने वाली ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव शामिल थी। इसके आधार पर, कोर्ट ने प्रतिवादी को अगली सुनवाई तक सपना चौधरी के पास जाने या उनसे संपर्क करने, उनके घर, ऑफिस (अस्थायी या स्थायी) या फिल्म प्रीमियर की जगह पर जाने और किसी भी तरह की घरेलू हिंसा करने से रोक दिया।

मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को

आदेश की प्रतियां लागू करने के लिए प्रोटेक्शन ऑफिसर और स्थानीय SHO को भेजने का निर्देश दिया गया। प्रोटेक्शन ऑफिसर को प्रतिवादी तक आदेश पहुंचाने का काम सौंपा गया और SHO को चौधरी को जरूरी सुरक्षा और सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई, 2026 को तय की गई है।

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